जानिए जल यानि पानी छानकर क्यों पीये

प्रशन — 1—जल यानी पानी किसे कहते है

*उत्तर —1—-जल नाम कर्म के उदय से प्राप्त पर्याय को जल कहते है अथवा जल ही जिसका शरीर है उसे जल कहते है

प्रशन —2— अनछना जल किसे कहते है

*उत्तर —2—जिस जल जीव के साथ दूसरे और असंख्यात जीव मौजूद हो, बादर तथा सूक्षम जीवो से युक्त हो तथा उसमे प्रत्येक क्षण जीव उत्पन्न होते है और मरते है उसे अनछना जल कहते है

प्रशन –3—अनछने पानी को पीने से क्या हानि होती है

*उत्तर—3—-अनछना पानी पीने से जीवो की हिंसा और विराधना का दोष लगता है जो महा पाप का बंध कराता है

प्रशन—4—अन्छने और सचित पानी पिने से क्या होता है।

उत्तर–4—डेंगू मलेरिया संक्रमण बुखार आदि आदि बहुत बीमारिया होती है।

प्रशन —5— वैज्ञानिको ने एक बुंद पानी मे कितने जीव बताये है

*उत्तर—5—-अनछने पानी की एक बूंद मे वैज्ञानिकों ने 36450 जीव चलते फिरते जीव बताये है

प्रशन —6— जैन तीर्थंकरो ने एक बूंद  पानी मे कितने जीव बताये है

*उत्तर—-6—-जैन अहिंसावादी तीर्थंकरो ने संख्यात असंख्यात त्रस जीव और सूक्षम जीव तथा बादर जलकायिक असंख्याता जीव बताये है

प्रशन —7—अनछने पानी की विराधना करने से कितना पापकर्म का बंध होता है

*उत्तर—-7—–अनछने पानी का प्रयोग करने से संख्यात असंख्यात और अनन्त जीवो की विराधना का दोष लगता है और 7-8 कर्मो का बंधन होता है।

प्रशन —8— अप्रासुक जल किसे कहते है

*उत्तर—-8—-बिना छने जल को अथवा त्रस व स्थावर जीवो से युक्त जल को अप्रासुक जल कहते है

प्रशन —-9—-सचित्त जल किसे कहते है

*उत्तर—-9—-जीव सहित जल को सचित्त जल कहते है

प्रशन —-10—-अचित्त जल किसे कहते है

*उत्तर—-10—-जिस जल मे त्रस स्थावर जीव अब नही रहे अर्थात प्रयोगकर जीवो को अलग कर दिया है और केवल शरीर मात्र है उसे अचित्त जल कहते है जिस जल मे चेतन जीव नही है उसे अचित्त जल कहते है

 

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