क्षमावाणी पर्व (kshamavani parv)

प्रिय दोस्तों
आज हम आपके समक्ष क्षमावाणी पर्व के उपलक्ष में चर्चा करेंगे की क्षमावाणी पर्व क्या है और यह कब और क्यों मनाया जाता है /अगर आप इस पर्व के बारे में पढ़ेंगे और जानेगे तो मेरा वादा है की आप को भी इस पर्व को मानाने की उत्सुकता होगी /
क्षमावाणी -”उद्पद्यते  शांत ”

हम मानते है की गलतिया मनुष्य से होती है गलतियों के लिए क्षमा मांग लेने और दुसरो को क्षमा देने से ही सुख शांति के द्वार खुलते है किसी की गलती के लिए मन में क्रोध करने ,उद्देग पैदा करने से हमारा ही नुकसान होता है ,हमारी शांति भंग होती है यदि आप लोग जीवन में सुख शांति चाहते है तो क्षमाशील बनिए /
गलती के लिए क्षमा मांग लीजिये और दुसरो को भी क्षमा करते जाइये/ यह पर्व दसलक्षण पर्व के आखिरी दिन मनाया जाता है अर्थात क्षमावाणी पर्व ”असौज कृष्णा एकम ” के दिन मनाया जाता है /
”क्षमा गहो उर जीवड़ा , जिनवर वचन गहाय,
नीर सुगंध सुहावनो , पदम  देह को लाय,
जन्म रोग निर्वारिये , सम्यक रत्न लहाय,
क्षमा गहो उर जीवड़ा , जिनवर वचन गाहय /
इस पर्व को हम ”मिक्षामि दुक्कडम ” के नाम से भी जानते है दिगम्बरो में यह ११ दिन शेताम्बरो में यह ८ दिन मनाया जाता है क्योकि शेताम्बरो में पर्युषण पर्व ८ दिन के होते है / मिक्षामि का भाव क्षमा और दुक्कडम का अर्थ गलतियों से है अर्थात मिक्षामि दुक्कडम कह कर हम अपनी गलतियों की क्षमा मांगते है जीवन के बैर भाव को मिटाता है /

जीवन में यदि कुछ भी अवयवस्थित हुआ हो तो पारम्परिक वयवस्था के अनुसार इसे दूर करने को क्षमायाचना कहते है /कहते है – यह अवयवस्था परिवार , रिश्तेदार ,समाज ,देश और राष्ट्र के अंतर्गत भी हो सकती है इस अवयवस्था को सद्भावपूर्वक सुधारने का जो महत्व है क्षमायाचना पर्व का है/ यह सब अवयवस्थाए इसलिए पैदा होती है की जीवन में तो गलतियां होती है किन्तु हम यह नहीं समझ पाते है कि यह गलतियां हमारे से हुई है कि अगले से /जब हम अपने दोषो ,गलतियों को मानना शुरू कर देते है तो हमारे अंदर क्षमाशील भाव आ जाता है तो कोई कुछ भी कहे मन में क्रोध नहीं आता जिनके मन में क्षमाशील भाव आता है वे  ख़ुशी , प्रसन्ता के प्रतिक बन जाते है उनके जीवन में सद्गुण खिलते है वे फूलो  कि तरह महकते है उनका जीवन क्षमा भाव से भर जाता है आप भी अपनी सोच ,चेतना,चिन्तन को अपनी आत्मा से जोड़ने का प्रयत्न करे अपने को जानने का प्रयास करे जब आप ऐसा करोगे तो आप भी दुसरो को क्षमा दे सकोगे यदि आप को कोई गाली भी देता है तो आप क्रोधित या उत्तेजित नहीं होंगे यदि आप क्रोधित होंगे तो आपकी पूरी चेतना उधर मुड़ जाएगी उसे ही देखने सोचने में लग जाएगी इससे हमारे अंदर कि ऊर्जा का बहिर्गमन होता रहेगा /क्रोध बढ़ता है उद्देग पैदा होता है इससे जो क्रिया होती है वह दोनों के लिए शुभ नहीं होती इसलिए कोई गाली देता है तो उसके विषय में सोचने कि बजाय ,स्यम के विषय में सोचे , चिंतन करे / सोचे आखिर हमारी क्या गलती है हमारे अंदर क्या कमी है जब हम अपने को समझ लेंगे तो हमारा क्रोध शांत हो जायेगा/ उत्तेजना , वैमनस्य , वैर विरोध , कमजोर हो जायेगे जीवन कि बुराई कमजोर हो कर दूर होती जायेगे संयम बरतने ,क्षमाशील होने से ही हमारे जीवन में परिवर्तन आता है /
सुख शांति व समृद्धि के लिए भगवन महावीर स्वामी द्वारा बताये अनुसार ‘क्षमा ‘ घर से शुरू करने का सुझाव दिया गया है थोड़ी देर सहनशीलता रखने ,संयम बरतने ,किसी कि गलती पर उसे क्षमा कर देने से परिवार ,समाज ,राष्ट्र व विश्व का भला ही होता है परिवार में यदि गलती होती है तो माफ़ी देने से प्रेम ,मोहब्बत बढ़ती है रिश्ते और अधिक प्रगाण होते है बहार भी अच्छा माहोल बनता है थोड़ी देर सहनशीलता रखने क्षमा करने में हमारा कुछ नुकसान नहीं होता बल्कि फायदा ही होता है क्षमा करके हम किसी का जीवन सुधार सकते है क्रूर से क्रूर व्यक्ति कि आत्मा को महान बना सकते है इसलिए तो अध्यात्म में क्षमा को ही सबसे बड़ा हथियार कहा गया है क्षमा को वीरो का गहना माना गया है आप भी अपने जीवन को इस गहने से सजाइये जीवन में हमेशा सुख शांति रहेगी /
*क्षमावाणी पर्व देता है मधुरता व मित्रता का सन्देश /
*क्षमावाणी पर्व माफ़ी देने व लेने का पर्व है /
*क्षमावाणी पर्व जीवन के बैर भाव दूर करने का पर्व है /
इस पर्व में हम चाहे छोटे हो या बड़े माफ़ी मांग कर अपनी गलतियों कि निर्जरा करते है इसलिए हम कह सकते है कि क्षमावाणी पर्व महान पर्व है अगर आप को इस पर्व के बारे में जान कर अच्छा लगा तो आप भी इस पर्व कि अच्छाइयों को अपने जीवन में उतारे और सब को क्षमा भाव करते जाये और ऐसे ही बहुत से पर्वो कि जानकारी हम देते रहेंगे आप पड़ना न बुले और हमारी साइट पर बार बार आते रहिये मेरा वादा है कि हम आप को जैन धर्म से जुडी और भी अच्छी अच्छी जानकारी देते रहेंगे /
”  धन्यवाद ”
”सादर जय जिनेद्र ”

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