नियती हमारे हाथ में नही पर नियत हमारे हाथ में हैं

सुबोध बहुत सफल व्यापारी और सुसंकृत व्यक्तित्व का धनी, उसने बहुत काम समय में व्यापार की समझ को पकड़ कर अपना स्थान स्थापित किया. शुरुआत में दिन रात मेहनत कर व्यापार को स्थापित किया और सब कुछ उसने बनाया यानी बंगला ,गाड़ी ,फैक्ट्री ,सामाजिक प्रतिष्ठा ,धार्मिक प्रभावना .मोहनी बहुत सुन्दर अच्छे संस्कारों वाली पत्नी,जिस दिन से वह आयी सुबोध के यहा तर्रक्की दिन दूनी रात चौगनी हो गयी ,सुबोध दिन रात कभी देश ,कभी विदेश का दौरा करता रहता पर व्यापार को अत्यंत व्यवस्थित कर लिया .हिसाब किताब हमेशा तैयार .मोहनी जब भी अपने मायके जाती  तो पूरा घर उसके स्वागत में तैयार रहता कारण घर की स्थिति सामान्य पर मोहनी ने सुबोध की जानकारी में सहयोग देना और कुछ बिना बताये मदद करना ,इसी बीच मोहनी ने कुछ रकम अपने भाई को दे दी की कुछ काम धंधा करना हो तो करो और जरुरत पड़ने पर मेरे काम आ सके. सुबोध और मोहनी का एक बालक सुयोग्य जो अपने परिवार के पद चिन्हों पर चल कर सुसंस्कार वान हुआ . उसने भी उच्च अध्धय्यन कर अपने पिता का व्यापार सम्हाला . सुबोध और मोहनी सुयोग्य की तरफ से निश्चिन्त.मोहनी के मायके में भी अच्छे दिन आ गए . भाइयों ने धंधा करके घर की हालात सुधार ली. कभी कभी मोहनी अपने पैसों का हिसाब पूछती तो भाई गोल मोल जबाब देते. पर मोहनी को यह अहसास होने लगा की कुछ गड़बड़ जरूर हैं .अब जब मोहनी मायके जाती तो उसके भाई, भाभी का व्यवहार में परिवर्तन आया, और उन्हें लगने लगा की मोहनी कही पैसों का तगादा न कर बैठे. मोहनी के मन में ऐसा कोई भाव नहीं था पर वह जानना चाहती थी की मेरे पैसों का क्या हुआ? और कुल कितना हैं ?जो भाई बताना नहीं चाहता. इससे मोहनी को भाई की नियत पर शक होना शुरू हुआ.

सुबोध हमेशा की तरह विदेश दौरे पर गया और एयरोप्लेन का एक्सीडेंट होने से उसकी मृत्यु हो गयी . मोहनी पहले से हिम्मत वाली थी और सुयोग्य को व्यापार में भागीदारी होने से सब काम ठीक ढंग से हो गया. सुबोध की मौत के बाद मोहनी मायके गयी तो देखा घर का वातावरण बदला हुआ हैं  कोई ढंग से बात नहीं करता और भाई इस डर  में की कही बहिन पैसा न मांग ले पर मोहनी एक प्रकार से औपचारिकता निभाने आयी थी. पर उसका मन इनके आचरण से मलिन हो गया.
सुबोध ने व्यापार की बाग़डोर सम्हाली तो उसका विकास दिन दून रात चौगना हो गया. एक दिन मोहनी को उड़ती उड़ती खबर मिली की उसके भाई को व्यापार में बहुत घाटा लगा कारण उनके बै बेटे ने दिन रात दूकान से पैसे चोरी कर यहाँ वह लुटाया और पिता के बराबरी का होने से लड़ने झगड़ने को तैयार और उसने स्पष्ट कहा आपने बुआ का धन बईमानी से हड़प लिया .आने  कोई श्रम से तो पैसा कमाया नहीं यदि आपने उनका पैसा धीरे धीरे वापिस किया होता या कुल कितनी रकम ली वह आज तक नहीं बताई यह आपकी नियत में खोट हैं .पाप जी नियत से बरक्कत होती हैं आपकी नियत साफ़ नहीं तो आपका जब तक पुण्य का ठाठ रहा खूब लाभ कमाया अब आपका समय परिवर्तन हो रहा हैं ,बुआ ने अपने आपको अच्छी नियत में रखा तो उनकी नियती आज भी अच्छी हैं .मुझे लगता हैं आपने धोका दिया है किसी को . नियती और नियत दोनों एक दूसरे के पूरक हैं .बुआ ने आपको अछि नियत से धन दिया पर आपके भाव बदलने से आपका पाप का उदय  होने के कारण मेरे मन में भी उस धन का दुरूपयोग करना शुरू किया . नियती हमारे हाथ में नही पर नियत हमारे हाथ में हैं .
डॉक्टर अरविन्द जैन शाकाहार परिषद् भोपाल.

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