जब विरोध करने आये और नतमस्तक हो गए

*आचार्य श्री १०८ विद्यासागर जी महामुनिराज* अपने संघ के साथ विहार करते हुये एक बंगाल के छोटे से शहर में आये आचार्य श्री का नगर प्रवेश होने वाला था तो समाज के कुछ लोग उनकी अगवानी करने आ गए, सुबह का समय था जैसे ही आचार्य श्री शहर की सीमा में आये कुछ अजैन लोग गुरुदेव और उनके संघ को बुरा भला बोलने लगे और उनका पीछा करने लगे, परन्तु आचार्य श्री के साथ समाज के कुछ लोग चल रहे थे इसलिये ज्यादा कुछ नही कहा_

🔴🔴🔴🔴🔴🔴🔴🔴🔴
*_आचार्य श्री वहाँ एक धर्मशाला में रुके और वही पास में मन्दिर के दर्शन करके धर्मशाला में ही आचार्य संघ की आहार चर्या सम्पन्न हुई, जब तक बाहर कुछ और असामाजिक लोग इकट्ठे होने लगे और जैन समाज के लोगों से भी झगड़ा करने लगे, आहार के बाद आचार्य श्री संघ ने सामायिक किया, सामायिक के बाद आचार्य श्री ने विहार करने के लिये समाज के लोगों से कहा, लेकिन वहाँ उपस्थित लोगों ने गुरुदेव से आग्रह किया की आज मत जाइए बाहर बहुत लोग खड़े हैं और आपके बारे में बुरा भला बोल रहे हैं_*
🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱
_परन्तु आचार्य भगवन को इन सब बातों की क्या चिंता थी, उन्होंने कहा समाज का कोई व्यक्ति हमारे साथ नही चलेगा ना आगे ना पीछे, परन्तु संघस्थ मुनिराजों को थोड़ी घवराहट हो रही थी( ऐसा भी मुनि श्री ने बताया) लेकिन गुरु आज्ञा कैसे टालते, आचार्य श्री ने कहा कोई ऊपर नही देखगा सब लोग नीचे निगाहें करके मेरे पीछे चलेंगे, आचार्य श्री अपने संघ सहित धर्मशाला के मुख्य द्धार पर आये और नीची निगाहों हल्का सा देखा तो दूर दूर तक हुड़दंगी पुरुषों की भीड़ दिखी, कोई चिल्ला रहा कोई कुछ बोल रहा, आचार्य श्री आगे बड़े…_
🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱
*_और जैसे ही आचार्य भगवन भीड़ के बीच पहुंचे तो पूरे माहोल में एकदम सन्नाटा हो गया… अभी कुछ क्षण पहले लोग चिल्ला रहे थे, लेकिन अब ये क्या हुआ एकदम इतना सन्नाटा…. आचार्य भगवन आगे बढ़ते गए और भीड़ तो जैसे दो हिस्सों में बंटती चली गयी, सभी मुनिराज गुरुदेव के चरणों के निशान पर चरण रखकर आगे बढ़ते चले गए, और ऐसी ही भीड़ लगभग 2 किलो मीटर तक रही, उसके बाद कम होती गई, जब शहर के बाहर आ गए तो समाज के लोग भी वहाँ पहुंच चुके थे, सभी लोग आचार्य भगवन के चरणों गिर गए और नेत्रों से तेज अश्रुधारा बहने लगी,वहाँ से विहार करके आचार्य श्री संघ अन्य किसी स्थान पर रात्री विश्राम को रुके और सब ठीक हो गया_*
*_🙏🏻धन्य है गुरु की महिमा🙏🏻_*

पश्चिम बंगाल के किसी शहर की घटना है.
मुनि श्री १०८ क्षमा सागर जी महाराज ने प्रवचन में सुनाई थी ये घटना.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *