चर्मचक्षु और ज्ञानचक्षु

एक बार बीरबल और अकबर में यह सवाल उठा कि संसार में आँखों वाले अधिक हैं या अन्धे? बीरबल ने कहा कि कौन अधिक हैं, वह प्रत्यक्ष दिखायेगा। उसने अपने सिर पर एक कपड़ा लपेटा और दरबार में बगल में बैठे व्यक्ति से पूछा -“मेरे सिर पर क्या है?” उस आदमी ने जवाब दिया-“पगड़ी।”

बीरबल ने वह कपड़ा सिर से उतार कर, दूसरे से पूछा-“यह क्या है?” “दुपट्टा है?” उस व्यक्ति ने कहा।

थोड़ी देर बाद उसी कपडे़ को पहिन कर, उसने दरबार में एक और व्यक्ति से पूछा -“यह क्या है?” “धोती” उस व्यक्ति ने कहा।

“अन्घे सब अन्धे हैं। यह कपड़ा है। इसको एक ने पगड़ी बताया, दूसरे ने दुपट्टा कहा और तीसरे ने इसको धोती समझा।” बीरबल ने कहा

अकबर यह सुन खुश हुआ। इसी प्रकार चिंवटी, हाथी और मनुष्य का भेद जड़बुद्धि में है। विवेक बुद्धि में ये सब “कारण परमात्मा” हैं। मुक्ति के पात्र होने से आदरणीय है।

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